उत्तर प्रदेश

बाघ तेंदुए हाथी का डर कम असली खतरा बना साइलेंट किलर

nidhi
9 Sept 2026 8:42 AM IST
बाघ तेंदुए हाथी का डर कम असली खतरा बना साइलेंट किलर
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जंगल के डर के पीछे छिपा बड़ा कारण
पीलीभीत: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में जंगल और वन्यजीवों का डर लोगों के बीच हमेशा बना रहता है। बाघ, तेंदुए और हाथियों की मौजूदगी के कारण ग्रामीणों में दहशत रहती है, लेकिन हालिया आंकड़ों ने एक अलग ही तस्वीर सामने रखी है। सामने आया है कि जिस खतरे को लोग सबसे बड़ा मानते हैं, उससे कहीं ज्यादा मौतें एक दूसरे ‘साइलेंट किलर’ की वजह से हुई हैं। पीलीभीत में वन्यजीव हमलों की तुलना में एक अन्य कारण से होने वाली मौतों की संख्या कई गुना अधिक रही है। इस खुलासे ने सुरक्षा व्यवस्था और ग्रामीण जागरूकता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सांप के काटने से ज्यादा मौतें
पीलीभीत के ग्रामीण इलाकों में सांप के काटने की घटनाएं बड़ी चिंता बनकर सामने आई हैं। कई मामलों में समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण लोगों की जान चली गई। जहरीले सांपों के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा बाघ और तेंदुए के हमलों से कई गुना ज्यादा बताया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के मौसम में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। खेतों, झाड़ियों और घरों के आसपास सांपों का खतरा अधिक रहता है।
वन्यजीवों से ज्यादा अनदेखा खतरा
बाघ और तेंदुए के हमले अक्सर सुर्खियों में रहते हैं, जिससे लोगों में इनका डर ज्यादा दिखाई देता है। वहीं सांपों का खतरा शांत और अचानक सामने आने वाला होता है, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सांप काटने के मामलों में तुरंत चिकित्सा सुविधा मिलना बेहद जरूरी है। देरी होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
जागरूकता और इलाज जरूरी
वन विभाग और स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। रात में बाहर निकलते समय सावधानी, घरों के आसपास सफाई रखना और सांप काटने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। ग्रामीणों को यह भी सलाह दी जाती है कि झाड़-फूंक के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
वन्यजीव संरक्षण के साथ सुरक्षा भी जरूरी
पीलीभीत टाइगर रिजर्व क्षेत्र होने के कारण यहां मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आती रहती हैं। हालांकि आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि ग्रामीणों के लिए अन्य प्राकृतिक खतरे भी उतने ही गंभीर हैं। बाघ और तेंदुए से बचाव के साथ-साथ सांपों से सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना भी जरूरी है।
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